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वरिष्ठ साहित्यकार, इतिहासकार एवं फतेहपुर की सांस्कृतिक स्मृति के संरक्षक डॉ. ओम प्रकाश अवस्थी का 94 वर्ष की आयु में निधन

वरिष्ठ साहित्यकार, इतिहासकार एवं फतेहपुर की सांस्कृतिक स्मृति के संरक्षक डॉ. ओम प्रकाश अवस्थी का 94 वर्ष की आयु में निधन

जनपद फतेहपुर की साहित्यिक-सांस्कृतिक विरासत को अपूरणीय क्षति, शोक की लहर फतेहपुर, 9 फरवरी 2026 — फतेहपुर जनपद के साहित्य, इतिहास और संस्कृति के क्षेत्र में एक युग पुरुष के रूप में विख्यात वरिष्ठ साहित्यकार, प्रख्यात आलोचक, इतिहासकार तथा शिक्षाविद डॉ. ओम प्रकाश अवस्थी का आज सोमवार को निधन हो गया। लगभग 94 वर्ष की आयु में उन्होंने अंतिम सांस ली। वे लंबे समय से अस्वस्थ चल रहे थे और दोपहर करीब 3 बजे उनका निधन हुआ। उनके निधन की खबर फैलते ही फतेहपुर सहित पूरे उत्तर प्रदेश के साहित्यिक, शैक्षिक और सांस्कृतिक जगत में गहरा शोक व्याप्त हो गया। 

डॉ. अवस्थी को फतेहपुर का "मूक प्रहरी" और "स्मृति-चेतना का संरक्षक" कहा जाता था, क्योंकि उन्होंने दशकों तक जिले के बिखरे हुए ऐतिहासिक, पुरातात्विक, साहित्यिक और सांस्कृतिक तथ्यों को व्यवस्थित रूप से संकलित कर एक अमूल्य धरोहर के रूप में संरक्षित किया। जन्म, शिक्षा एवं शैक्षिक जीवन डॉ. ओम प्रकाश अवस्थी का जन्म 26 जुलाई 1937 को फतेहपुर जनपद के ग्राम सोझा में हुआ था। उन्होंने कानपुर विश्वविद्यालय (वर्तमान में छत्रपति शाहू जी महाराज विश्वविद्यालय) से हिंदी साहित्य में गहन अध्ययन किया। पीएचडी — ‘नई कविता : रचना-प्रक्रिया’ विषय पर। डी.लिट् — ‘हिन्दी की रसवादी आलोचना का दार्शनिक एवं सैद्धांतिक स्वरूप’ विषय पर। वे आचार्य रामचंद्र शुक्ल को अपना आदर्श मानते थे और रसवादी आलोचना परंपरा के मजबूत समर्थक एवं विस्तारक रहे।


 1970 से 1998 तक उन्होंने महात्मा गांधी महाविद्यालय, फतेहपुर में हिंदी विभागाध्यक्ष के रूप में कार्य किया। इस दौरान उन्होंने हजारों छात्रों को हिंदी साहित्य, आलोचना शास्त्र और इतिहास की समग्र एवं गहन दृष्टि प्रदान की। उनकी शिक्षण शैली और विचारों ने कई पीढ़ियों को प्रभावित किया। प्रमुख कृतियाँ एवं फतेहपुर इतिहास में अमिट योगदान डॉ. अवस्थी का सबसे बड़ा योगदान फतेहपुर के इतिहास, पुरातत्व, साहित्य और संस्कृति को एक सूत्र में पिरोने में है। उनकी दो प्रमुख कृतियाँ इस दिशा में मील का पत्थर हैं: ‘अनुवाक’ — फतेहपुर के बिखरते अतीत को दस्तावेजी रूप देने वाली पहली प्रमुख कृति, जिसमें जिले के वैदिक युग से लेकर विभिन्न कालखंडों के प्रमाणिक तथ्य संकलित हैं। ‘अनुकाल’ (तीन खंडों में) — ‘अनुवाक’ का अगला चरण। इसमें पुरातत्व, इतिहास, मूर्तिकला, साहित्य और संस्कृति के विविध आयामों को विस्तार से प्रस्तुत किया गया है। पहले खंड में 29 लेख पुरातत्व एवं इतिहास पर, दूसरे में अकबर काल से साहित्यिक विकास, तथा तीसरे में संस्कृति एवं कला पर केंद्रित हैं। इन ग्रंथों के माध्यम से उन्होंने फतेहपुर के प्राचीन मंदिरों (जैसे बावनी इमली, भिटौरा, असनी आदि), स्थलों, साहित्यकारों और सांस्कृतिक धरोहरों को संजोया। वे अक्षय साहित्य कला केंद्र के मजबूत स्तंभ रहे और कई साहित्यिक-सांस्कृतिक संस्थाओं के संरक्षक/मार्गदर्शक बने। उनकी अन्य महत्वपूर्ण कृतियाँ: रचना प्रक्रिया नई कविता आलोचना की फिसलन अज्ञेय कवि व अज्ञेय गद्य निधन पर शोक संवेदनाएँ एवं प्रभाव साहित्यकारों, शिक्षाविदों, शोधकर्ताओं और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने उन्हें "फतेहपुर की स्मृति-चेतना का जीवंत संवाहक" बताते हुए गहरा शोक व्यक्त किया है। उनका कहना है कि डॉ. अवस्थी केवल एक लेखक या इतिहासकार नहीं थे, बल्कि जनपद की सांस्कृतिक पहचान के संरक्षक थे। उनके निधन से इतिहास एवं संस्कृति संरक्षण का कार्य और अधिक चुनौतीपूर्ण हो गया है। वे पीछे एक समृद्ध साहित्यिक विरासत, शोधपरक ग्रंथ और असंख्य शिष्य छोड़ गए हैं, जो उनकी परंपरा को जीवित रखेंगे। ईश्वर दिवंगत महान आत्मा को शांति प्रदान करें। शोकाकुल परिजनों, शिष्यों एवं फतेहपुरवासियों को यह दुःख सहन करने की शक्ति दें। ॐ शांति शांति शांति।

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