अमौली,फतेहपुर
गौरवशाली इतिहास और सांस्कृतिक धरोहर का प्रतीक 'अमौली का मेला' आज अपने 154वें वर्ष के सफर को पूरा करते हुए संपन्न होने जा रहा है। डेढ़ सदी से चली आ रही इस अनूठी परंपरा में इस वर्ष भी भक्ति, व्यापार और मनोरंजन का अद्भुत संगम देखने को मिला। आज मेले के अंतिम दिन भारी भीड़ जुटने की संभावना के मद्देनजर प्रशासन और मेला समिति ने सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए हैं।
करीब डेढ़ सौ वर्षों से लगातार आयोजित हो रहे इस मेले ने समय के साथ कई बदलाव देखे हैं, लेकिन इसकी मौलिकता आज भी बरकरार है। मेले के दौरान जहाँ भगवान श्रीराम की लीलाओं ने दर्शकों को भावविभोर किया, वहीं विशाल झूले, सर्कस जैसे आकर्षणों ने युवाओं और बच्चों का भरपूर मनोरंजन किया।
अमौली का यह मेला न केवल मनोरंजन का साधन है, बल्कि स्थानीय व्यापारियों और कारीगरों के लिए आय का एक बड़ा जरिया भी है। मेले में हस्तशिल्प, लकड़ी के सामान, और घरेलू उपयोग की वस्तुओं की भारी बिक्री दर्ज की गई। अंतिम दिन होने के कारण आज ग्रामीण क्षेत्रों से लोग जमकर खरीदारी करने पहुंचने की उम्मीद है।
मेले के सफल संचालन के लिए मेला कमेटी और पुलिस प्रशासन ने कंधे से कंधा मिलाकर काम किया। अंतिम दिन की भीड़ को नियंत्रित करने के लिए चप्पे-चप्पे पर पुलिस बल तैनात रहेगी और संदिग्ध गतिविधियों पर नजर रखी जाएगी।
आज देर शाम औपचारिक पूजन और शांतिपूर्ण समापन के बाद, यह मेला अगले वर्ष फिर से सजने के वादे के साथ विदा लेगा। क्षेत्रीय निवासियों के लिए यह समापन भावनात्मक क्षण होता है, क्योंकि यह मेला केवल एक आयोजन नहीं, बल्कि उनके पूर्वजों की विरासत है।
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